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सुणा मेरा स्वामी जी सावण आयो / गढ़वाली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

सुणा मेरा स्वामी जी सावण[1] आयो।
रूण-झुणया[2] वर्षा, घनघोर लाया।
दौड़ी दौड़ी कुयेड़ी[3], डाडू मा आयो।
कुयेड़ी न स्वामी, अंधियारों छायो।

शब्दार्थ
  1. सावन
  2. रिमझिम
  3. कुहरा