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सुनो इतना कुछ कि / मदन कश्यप

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सुनो इतना कुछ कि कुछ भी न सुन सको
जानो इतना कुछ कि कुछ भी न जान सको
समझो इतना कुछ कि कुछ भी न समझ सको

आवाज़ों में डूब रही हैं आवाज़ें
आवाज़ों को डूबोने वाली आवाज़ें
किन्हीं और आवाज़ों में डूब रही हैं
धूर्त और क्रूर सौदागरों से सजा है बाज़ार ।