भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सूत्र एकल काव्य पाठ (कैलाश पण्डा, नोहर)

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कविता कोश व श्री शारदा साहित्य संस्थान, नोहर के मासिक कार्यक्रम 'सूत्र' के अन्तर्गत दिनांक 23.12.2017 को स्थानीय रूद्रा कम्पयूटर्स पर वैद्य कैलाश पण्डा का एकल काव्य पाठ आयोजित हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री दुर्गेश जोशी 'सुगम' ने की। सर्वप्रथम माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित किया गया। आशीष पुरोहित ने कार्यक्रम श्रृंखला 'सूत्र' का परिचय देकर उद्देश्य स्पष्ट किया।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में वैद्य कैलाश पण्डा ने अपना काव्य-पाठ प्रस्तुत किया। वैद्य कैलाश पण्डा ने अपनी रचनाओं में अध्यात्म, प्रेम, श्रृंगार व योग की कविताएँ प्रस्तुत की साथ ही सस्वर गीतों का भी वाचन कर श्रोताओं की वाह-वाह बटोरी।

Kailash-panda-reciting-nohar-program.jpg

कार्यक्रम के द्वितीय चरण में वैद्य कैलाश पण्डा की रचनाओं पर चर्चा सत्र प्रारम्भ हुआ जिसमें श्रोताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएँ प्रस्तुत की।

इस सम्बन्ध में चर्चा करते हुए डॉ. शिवराज भारतीय ने पण्डा की रचनाओं को गूढ़ आध्यात्मिकता लिए हुए बताया जो सामान्य पाठक के स्तर से ऊपर हैं तथा भाषायी पक्ष को सामान्य व सहज बनाने की आवश्यकता है।

इसी कड़ी में श्री प्रदीप पुरोहित ने पण्डा जी की कविताओं की सराहना करते हुए उन्हें जन-सामान्य तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।

श्री महेन्द्र प्रताप शर्मा ने पण्डा जी की रचनाओं की समीक्षा करते हुए इन्हें गम्भीर चिन्तन से परिपूर्ण बताया तथा भविष्य में भाषायी पक्ष को सहज रखने की सलाह दी। श्री शर्मा ने कविताओं के शिल्प पर चर्चा कर कतिपय पंक्तियों को उदाहरण स्वरूप प्रस्तुत किया।

श्री रमेश शर्मा ने पण्डा जी की रचनाओं में निहित आध्यात्म को उर्दू शेरों से स्पष्ट कर मूल कथ्य पर प्रकाश डाला।

कमलेश शर्मा व डॉ. भवानी शंकर व्यास ने भी पण्डा की कविताओं को मर्मस्पर्शी बताया तथा उसकी भावानुकूल भाषा व चिन्तन की सराहना की।

अभिषेक पारिक ने वैद्य जी की रचनाओं को उनके व्यवसाय से ही जोड़ते हुए कहा कि मनोविकारों को दूर करने के लिए इनकी कविाताओं अध्यात्म रूपी औषधीय गुणों से युक्त है।

देवेन्द्र जोशी ने भी कविताओं पर समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की।

सचिव आशीष पुरोहित ने काव्य में आध्यात्म व सूफीज्म की तुलना कर उनके महत्व व आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए महेन्द्र प्रताप शर्मा ने भी श्री पण्डा की रचनाओं पर चर्चा करते हुए उन्हें तीव्र अनुभूति व संवेदनाओं से परिपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इन रचनाओं में वैचारिक पक्ष की प्रधानता है जो रचनाकार के चिन्तन का प्रतिनिधित्व है।

श्री शारदा साहित्य संस्थान के श्री राकेश दीक्षित ने पण्डा के एकल काव्य पाठ पर शुभकामनाऐं देते हुए सभी को धन्यवाद दिया व आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में ऐसे आयोजनों हेतु प्रेरित किया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री दुर्गेश जोशी ने एक सफल आयोजन हेतु आयोजकों को बधाई दी व निरन्तर साहित्यिक आयोजनों की आवश्यकता बताई। अन्त में श्री कैलाश पण्डा को स्मृति चिन्ह व साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।

Kailash-panda-memento-nohar-program.jpg