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सूरज जी हड़ताल / मीरा हिंगोराणी

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ढ़ोल-धमाको सावणु आयो,
वॻी उभ में खड़ताल,
छो कई आ सूरज हड़ताल।

भिॼी वई अम्मां जी वछिड़ी,
थी भभीअ जी आली साड़ी।
चवे बू/टनि में भरियो आ पाणी,
डुकंदो गंगू माली/आयो...
ढ़ोल ढ़माको सावणु आयो।

नालनि में पाणीअ जो ज़ोर,
घिटीअ-घिटीअ ॿारनि जो शोरु,
रसु मलाई थी वई आली।

भरजी रंघणे में वियोपाणी,
ढ़ोल-धमाको सावणु आयो।