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सूर्यास्त में / जय गोस्वामी / रामशंकर द्विवेदी

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झर पड़ा हो मेरे ऊपर
मानो स्नान-जल ।

बालक की देह
हाथ से पोंछकर
फिर उसे सजाओ !

लगाओ काजल
फिर छोड़ दो शिशु को बागान में

इस जीवन को
पवित्र करो
सूर्यास्त के स्नान से

मूल बाँगला भाषा से अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी