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सूर्य ऊपर वैसे ही चमकता है / अहमेद फ़ौआद नेग़्म / राजेश चन्द्र

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सूर्य ऊपर
वैसे ही चमकता है
जैसे हमारे यहाँ
धरती परिपूर्ण है सम्पन्नता,
जनता और भद्रता से।

सिर्फ़ अमेरिकी गिरोह
जमे हैं पालथी मारे
ग़रीब जन की छाती पर,
भेड़िए चले आ रहे हैं
तेज़ गति से जंगली सियारों की तरह

और भड़ुए चार
जो बन गए हैं इधर बड़े पत्रकार
खड़े हैं करताल लिए,
वे नाचते हैं हर एक शासक की ताल पर।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : राजेश चन्द्र