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स्मार्ट सिटी / देवी प्रसाद मिश्र

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एक ऐसा शहर तो चाहिए ही कि जहाँ एक छोटा ही सही अस्पताल हो जिसमें
पिता की तानाशाही का इलाज मुफ्त हो और बहन के
डिप्रेशन का।

एक ऐसा शहर चाहिए कि जिसमें एक सड़क पर कम्युनिस्ट पार्टी का दफ़्तर हो
दूसरा भी खुलने वाला हो उन लोगों का
जो पहलीपार्टी से असहमत थे
और तीसरा भी जो इस मत के हों कि जो
असन्तुष्ट हैं वे बहुत कम असन्तुष्ट हैं।

एक ऐसा शहर तो चाहिए ही कि आँख तरेरने वाली लापरवाह
छात्राओं का विद्यालय मुख्य सड़क पर हो।

कि जिसमें बहुत सारी साइकिलें हों और बहुत सारी साइकिलों को टिकाने के लिए बहुत सारे पेड़
और बहुत सारे पेड़ों के बहुत सारे पत्ते
जो बहुत सारे विरोध के झण्डों की तरह बहुत सारा फड़-फड़ करें और
सड़क पर अगर ह्यून्दाई दिखे तो पान की दुकान पर
चर्चा शुरू हो जाए कि इस तिकड़मी के पास इतने पैसे कहाँ से
आ गए। किसको लूटा इसने।

कि एक धूल भरी सड़क पर जिस पर कम आवाजाही हो
वहाँ कोने में काफी छोटा तिकोना पार्क हो जहाँ प्यार किया जा सके और
जिसे राष्ट्रीय या क्षेत्रीय या जिला या मोहल्ले स्तर तक का भी
भाजपा अध्यक्ष अपनी किसी सभा के लिए बुक न करवा सके।

एक ऐसा शहर तो चाहिए ही कि जहाँ मर्दाना कमज़ोरी के इलाज की एक भी दुकान न हो
कि जिसकी किसी भी सड़क पर खिलौने मिलें ही
स्त्रियों के सेक्स टॉय की कम से कम एक दुकान तो
होनी ही चाहिए स्मार्ट सिटी में।