भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हथौड़ा डॉक्टर / सुकुमार राय

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बंगला में 'हातुड़े' का मतलब है नीमहकीम या झोला डॉक्टर और 'हातुड़ी' का अर्थ है हथौड़ा या हथौड़ी। इस बाल-कविता में इन दोनों के शब्दसाम्य से हास्य और चमत्कार पैदा किया गया है जो हिन्दी में सम्भव नहीं था। इसलिए मैंने शीर्षक ही "हथौड़ा डॉक्टर" कर दिया। एक नई बात पता चली कि डेंगू तब भी था। -- अनुवादक

देख जाओ एक बार डाक्टरी करामात
चीरफाड़, तोड़फोड़ साथ-साथ मरम्मात।
कहा था गुरु जी नेे सुनो बेटा रामदास
काग़ज़ का रोगी काट प्रथम करो अभ्यास।
कुछ भी सम्भव है यदि हौसला हो, लगन हो
सध गया हाथ जब रियाज़ किया, मगन हो।
मशक्कत तो बहुत हुई, बड़े छूटे पसीने
पारंगत होने में लगे कई महीने।
विद्या अब सहज हुई, देखते ये औज़ार?
काटने के, ठोकने के, जोड़ने के हथियार?
तोड़े हैं, जोड़े हैं पुतले कई - कई
काटने में मज़ा खूब, जोड़ने में कम नहीं।
हाथ, पैर, गला काटे, ठीक-ठाक करके
गोंद से फिर चिपकाए, जोड़ दिए पक्के।

इसीलिए चाहता हूँ रोगी अब ज़िन्दा
ओ भोला! पाँच छह रोगी जा पकड़ ला।
गठिया से हलकान उधर जो बख्शी है
ठीक नहीं होने की क़सम खा रक्खी है।
बहलाकर किसी दिन इधर उसे लाते हैं
पीस-पास गठिये की चटनी बनाते हैं।
नाक का ज़ुकाम हो या कान का झमेला
डर क्या? जब हाज़िर है डॉक्टर अलबेला।

वो कौन लेटा है? टूट गया पैर ? लाओ
कस देता पेंच लगा, हँसी ख़ुशी घर जाओ।
गला फाड़ रोता क्यों ? दाँतों में कष्ट है?
ला ज़रा ठोकने दे, रोग तो स्पष्ट है
इस तरफ़ दो दाँत, उस तरफ़ तीन अदद
सँड़सी किधर है, खोजो, खींचने में करो मदद।
क्या बच्चा, क्या बूढ़ा, क्या अन्धा, अपाहिज
क्या हैज़ा, क्या डेंगू, फ़रक नहीं हरगिज़।
काला आज़ार, मियादी, पुराना-नया
एक हथौड़े की पड़ी और रोग गया !

सुकुमार राय की कविता : ’हातुड़े’ का अनुवाद
शिव किशोर तिवारी द्वारा मूल बांग्ला से अनूदित