भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हमदर्द / फ़राज़

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज



ऐ दिल उन आँखों पर न जा
जिनमें वफ़ूरे-रंज[1]से
कुछ देर को तेरे लिए
आँसू अगर लहरा गए

ये चन्द लम्हों की चमक
जो तुझको पागल कर गई
इन जुगनुओं के नूर[2]से
चमकी है कब वो ज़िन्दगी
जिसके मुक़द्दर[3]में रही
सुबहे-तलब [4]से तीरगी[5]


किस सोच में गुमसुम है तू
ऐ बेख़बर! नादाँ[6]न बन
तेरी फ़सुर्दा रूह[7]को
चाहत के काँटों की तलब
और उसके दामन में फ़क़त[8]
हमदर्दियों के फूल हैं.

शब्दार्थ
  1. दु:खों की बहुतायत
  2. प्रकाश
  3. भाग्य
  4. माँगने की प्रभात से
  5. अँधेरा
  6. मूर्ख
  7. उदास आत्मा
  8. केवल