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हम और तुम-1 / बोधिसत्व

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यदि हम एक-दूसरे के बर्तन होते
तो हम लिखवाते शायद एक-दूसरे पर अपने नाम
यदि हम एक-दूसरे के लिए किताब होते तो उस पर लिखते अपने नाम
कितनी जगहों पर रेखाएँ खींच कर दर्ज करते कुछ न कुछ
हज़ार बर्तनों और हज़ार किताबों के बीच
खोज लेते पा लेते एक दूसरे को ।