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हम और तुम-2 / बोधिसत्व

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हमने यही तो किया
देह का दीपक जला कर
एक-दूसरे को पढ़ा
एक-दूसरे पर लिखा जो मन में आया
हमने तन की मिट्टी गूँथ कर
एक-दूसरे को गढ़ा
जैसा चाहा बनाया ।

हमने एक दूसरे को कैसे-कैसे पाया
हमने एक दूसरे को कैसे-कैसे भास्वर गाया ।