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हम न तो शव हैं और न ही देवता / काएसिन कुलिएव / सुधीर सक्सेना

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सिर्फ़ मृतक चिन्ताओं से मुक्त हैं
वे अन्धे और गूँगे हैं, इसीलिए
उन्हें बख़्शती हैं चिन्ताएँ ।
मगर हमारे पास आती हैं वे
ठण्ड की बारिश की तरह
और भड़भड़ा देती है हमारी खिड़कियाँ ।

हम न तो शव हैं और न ही देवता
हम सिरजे गए हैं जूझने को
हम अभ्यस्त हैं संकटों के,
आदी हैं चिन्ताओं के
वे सिर्फ़ मृतकों को बख़्शती हैं ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : सुधीर सक्सेना