भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

हम हैं ताना-हम हैं बाना / उदय प्रकाश

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हम हैं ताना, हम हैं बाना ।
हमीं चदरिया, हमीं जुलाहा, हमीं गजी, हम थाना

नाद हमीं, अनुनाद हमीं, निःशब्द हमी गंभीरा,
अंधकार हम, चाँद सूरज हम, हम कान्हा हम मीरा ।
हमीं अकेले, हमी दुकेले, हम चुग्गा, हम दाना ।।
मंदिर-महजिद, हम गुरुद्वारा, हम मठ, हम बैरागी
हमीं पुजारी, हमीं देवता, हम कीर्तन, हम रागी ।
आखत-रोली, अलख-भमूती, रूप धरे हम नाना ।।
मूल-फूल हम, रुत बादल हम, हम माटी, हम पानी
हमीं जहूदी-शेख-बरहमन, हरिजन हम ख्रिस्तानी ।
पीर-अघोरी, सिद्ध-ओलिया, हमी पेट, हम खाना ।।
नाम-पता, ना ठौर-ठिकाना, जात-धरम ना कोई
मुलक-ख़लक, राजा-परजा हम, हम बेलन, हम लोई ।
हमही दुलहा, हमीं बराता, हम फूँका, हम छाना ।।