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हरे राम हरे राम, राम-राम हरे-हरे / बोधिसत्व

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घरे-घरे दौपदी, दुस्सासन घरे-घरे ।
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे-हरे ।।

गली-गली कुरुक्षेत्र, मरघट दरे-दरे ।
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे-हरे ।।

देस भा अंधेर नगर, राजा चौपट का करे ।
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे-हरे ।।

सीता भई लंकेस्वरी, राम रोवें अरे-अरे ।
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे-हरे ।।

राजा दसरथ भुईं लोटैं, राज करे मंथरे ।
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे-हरे ।।

आम गा महुवा गा, अब त बस बैर फरे ।
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे-हरे ।।

कोयल मोर मूक भए, दादुर टर-टर टरे ।
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे-हरे ।।

ऊपर से कुछ बात, और कुछ बा तरे-तरे ।
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे-हरे ।।