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हर हुनर हासिल किया दिल में उतरने के सिवा / रवि सिन्हा

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हर हुनर हासिल किया दिल में उतरने के सिवा 
गुफ़्तगू आसान है बस ख़ुद से करने के सिवा

बात वो करते नहीं जो बात बनने की न हो 
बात का होना भला क्या अब बिगड़ने के सिवा 

सच परेशाँ हर तमाशे में हक़ीक़त डाल दे
झूठ को क्या काम ठहरा सच से लड़ने के सिवा

इल्म का छोटा जज़ीरा[1] बेकराँ[2] बह्रे-हयात[3]  
क्या करे कोई तमन्ना डूब मरने के सिवा

शक़्ल आँधी को अता कर थमा दे रहमत या बर्क़[4]
दश्त[5] में होना भी क्या है धूल उड़ने के सिवा

वो हिमाला बैठ के सैलाब को देखा किए
नूहे-हिन्दुस्तान क्या करते ये करने के सिवा

झाँकती हैं अब मशीनें आदमी की रूह में 
अब ख़ुदी को राह क्या गहरे उतरने के सिवा

शाख़ से हर शाख़ तक की मंज़िलें सारी तमाम
ख़ला[6] लामहदूद[7] अब क्या अज़्म[8] उड़ने के सिवा 

बात आगे मुख़्तसर है औ’ गुज़श्ता[9] है तवील[10]
काम भी अब क्या बचा है याद रखने के सिवा

शब्दार्थ
  1. - टापू (island)
  2. असीमित (unbounded)
  3. ज़िन्दगी का समुद्र (ocean of life)
  4. बिजली (lightning)
  5. रेगिस्तान (desert)
  6. शून्य, अन्तरिक्ष (space)
  7. असीमित (unbounded)
  8. संकल्प (determination, intention)
  9. अतीत (past)
  10. दीर्घ (long)