भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हालात से इस तरह परेशान हुये लोग / अमित

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हालात से इस तरह परेशान हुये लोग
तंग आके अपने आप ही इंसान हुये लोग[1]

जो थे खु़दी पसन्द[2] उन्हे फ़िक्रे-ख़ुदा[3] थी
जो थे खु़दा पसन्द[4] वो हैवान हुये लोग

जिस खूँ से जिस्मो-जाँ[5] में हरारत[6] जुनूँ[7] की थी
वो बह गया सड़क पे तो हैरान हुये लोग

ईमान फ़क़त हर्फ़े-तवारीख़[8] रह गया
इस दौर में इस क़दर बेईमान हुये लोग

अब दर्द के रिस्तों का जिक्र क्या करें ’अमित’
बस अपनी जान के लिये बेजान हुये लोग

शब्दार्थ
  1. यह शेर एक खुश-फ़हम भविष्य कथन (Prophesy) है।
  2. अह्म ब्रह्मास्मि (अन-अल-हक़) के तरफ़दार
  3. ईश्वर का ध्यान
  4. वाह्याचारी
  5. शरीर और प्राण
  6. गर्मी
  7. जुनून
  8. इतिहास का शब्द।