भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

हाल चाल कांई बतावां भायला / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हाल चाल कांई बतावां भायला
रोज लावां रोज खावां भायला

औ सूरज है म्हांरी अनमोल घड़ी
इणी सागै सोवां-जागां भायला

काल री काल देखसां सुण तो सरी
आज तो आ सांस बचावां भायला

निभै जित्तै तो निभाणो ई है धरम
मांय रोवां ऊपर गावां भायला

ठाह पड़ जावै तो करजै मत रीस
खुद सूं ई मूंडो लुकोवां भायला