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हूणियै रा होरठा (3) / हरीश भादानी

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जकां न देखी कळपती
चींती कायाकळ्प
आखर रच्या अणूत
आंख्यां मींच्यां हूणिया

धूंसा साथै बाजता
गढ कोटां रा बोल
गाजै मांड अडाण
नूंवा राजा हूणिया

पैला राणी जामती
अब जामै संदूक
 सागी राजा राज
गाभा बदळया हूणिया

पांचै बरसै जैवड़ा
लटकै बजै चुणाव
लोकराज रै मै’
लूंठा पूगैे हूणिया

बिनर निसरणी रा बण्या
लोकराज रा मै’ल
देखै आंख्यां फाड़
‘‘सैचासै’’ सूं हूणिया

हाका करतां रा फटै
 पेट काळजा रोज
बंदूकां कानून
तीबा देवै हूणिया

भाषणआळी मील में
रोज बुणीजै थांन
मसां आदमी दीठ
खफण लंगोटी हूणिया

गोठ योजना री करै
सोनो रूपो रांध
चाखण में सौ जीम
झोळ पुरसर्द हुणिया