भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

'राधे! कैसे भूली जायें / गुलाब खंडेलवाल

Kavita Kosh से
Vibhajhalani (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 18:53, 29 अगस्त 2012 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=गुलाब खंडेलवाल |संग्रह=गीत-वृंदा...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


राधे! कैसे भूली जायें
'वृन्दावन के कुंजवनों की वे मोहक लीलायें !

जब तू मान किये कुछ ऐंठी
रूठ कदम्ब तले थी बैठी
मुरली-ध्वनि कानों में पैठी
दौड़ी उठा भुजायें!

घबरा मेरे क्षणिक विरह में
जब तू उतरी कालियदह में
संगी जहाँ खड़े थे सहमे
छोड़ सभी आशायें!

प्रिये! याद कर वे दिन सुन्दर
प्राण-विहाग प्रतिपल हैं क़तर
पर पिंजरे में वंदी हैं पर
कैसे तुझ तक आयें '

राधे! कैसे भूली जायें
'वृन्दावन के कुंजवनों की वे मोहक लीलायें !