भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अंगिका / अमरेन्द्र

Kavita Kosh से
Rahul Shivay (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 08:31, 10 जून 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=अमरेन्द्र |अनुवादक= |संग्रह=बुतरु...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दादी-नानी खकसी बोललै-
हमरोॅ भाषा अंगिका ।
अंगिका ही ढोलक-तुतरु
तड़बड़ तासा अंगिका ।
बुनिया, चमचम, रसगुल्लो सब
यहेॅ बतासा अंगिका ।
बिन्दी, टिकुली, चूड़ी-चुनरी
झुमका-पासा अंगिका ।
ई बोलैवालाµघरवैया
आरो वासा अंगिका ।
अंगिका ही माय छै-
बोलै ई भौजाय छै ।
अंगिका माय जै पर खुश
ऊ सब खुश छै, बाकी फुस ।