भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अंदाज़ जुदा होगा / ज्योत्स्ना शर्मा

Kavita Kosh से
वीरबाला (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 03:59, 6 जुलाई 2018 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जिस पर वक़्त फ़िदा होगा ,
वो अंदाज़ ...जुदा होगा ।१

तेरे दर को छोड़ कहीं ,
हमसे ना सज़दा होगा ।२

भले लबों पर हो मुस्कान ,
चेहरा खौफज़दा होगा ।३

पीर पराई क्या दीखे ,
स्वारथ का परदा होगा ।४

तनहाई में सोच वतन का ,
कैसे फ़र्ज़ अदा होगा ।५