Last modified on 11 अक्टूबर 2018, at 21:42

अखरोट का पेड़ / नाज़िम हिक़मत / अनिल जनविजय

झाग का बादल है मेरा सिर और मेरी छाती में समुद्र है
मैं गुलख़ान पार्क में खड़ा अखरोट का पेड़ हूँ
बड़ा हो गया हूँ बहुत, पुराना हूँ
देखिए, मेरी डगालें फैली हैं चारों तरफ़
लेकिन न तो पुलिस मेरे बारे में कुछ जानती है, न ही आप

गुलख़ान पार्क में खड़ा अखरोट का पेड़ हूँ मैं
मछलियों की तरह काँपती हैं मेरी पत्तियाँ
सुबह से शाम तक और रात भर
रेशमी रुमाल की तरह सरसराती हैं, भरभराती हैं
अरी प्यारे, तोड़ ले हमें और अपने आँसू पोंछ ले

ये पत्तियाँ हीं मेरे हाथ हैं, एक लाख हरे हाथ
अपने एक लाख हरे हाथ फैलाकर, मैं तुम्हें छूता हूँ इस्ताम्बूल
मेरी पत्तियाँ मेरी आँखें हैं. जिनसे मैं चारों तरफ़ देखता हूँ
अपनी लाखों आँखों से निहारता हूँ
निहारता हूँ तुम्हें इस्ताम्बूल

मेरी पत्तियाँ धड़कती हैं एक लाख दिलों की तरह
मैं गुलख़ान पार्क में खड़ा अखरोट का पेड़ हूँ
लेकिन न तो पुलिस मेरे बारे में कुछ जानती है, न ही आप

रूसी से अनुवाद : अनिल जनविजय