भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अबस अबस तुझे मुझ से हिजाब / 'फ़ुगां'

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 20:42, 4 अप्रैल 2013 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=अशरफ़ अली 'फ़ुगां' }} {{KKCatGhazal}} <poem> अबस अ...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अबस अबस तुझे मुझ से हिजाब आता है
तेरे लिए कोई ख़ाना-ख़राब आता है

पलक के मारते हस्ती तमाम होती है
अबस को बहर-ए-अदम से हुबाब आता है

ख़ुदा ही जाने जलाया है किस सितम-गर ने
जिगर तो चश्म से हो कर कबाब आता है

शब-ए-फ़िराक़ में अक्सर मैं ले के आईना
ये देखता हूँ कि आँखों में ख़्वाब आता है

नज़र करूँ हूँ तो याँ ख़्वाब का ख़याल नहीं
गिरे है लख़्त-ए-जिगर या कि आब आता है