भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अबोध अधम / नाथूराम शर्मा 'शंकर'

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 10:42, 29 दिसम्बर 2011 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार= नाथूराम शर्मा 'शंकर' }} {{KKCatPad}} <poem> मुझ ...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मुझ से कौन अबोध अधम है।
समता मिटी सत्व-रज-तम की, गौणिक विकृति विषम है,
सुखद विवेक-प्रकाश कहां है, नरक-रूप भ्रम-तम है।
मन में विषय-विकार भरे हैं, तन में अकड़ न कम है,
रहा न प्रेम-विलास वचन में, तनक न त्रिक संयम है।
विकट वितण्डावाद निगम है, कपट जटिल आगम है,
मंगल मूल मनोरथ अपना, अनुपकार अनुपम है।
अब कुछ धर्म-भाव उपजा है, यह अवसर उत्तम है,
पर करुणा-सागर ‘शंकर’ का, न्याय न निपट नरम है।