भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

अरे, तू क्यों अमूल्य तन खोवै? / हनुमानप्रसाद पोद्दार

Kavita Kosh से
Gayatri Gupta (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 10:19, 3 जून 2014 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=हनुमानप्रसाद पोद्दार |अनुवादक= |स...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

(राग तैलंग-ताल त्रिताल)

अरे, तू क्यों अमूल्य तन खोवै?
क्यों अनित्य सुखरहित जगत‌ की ममता-निशिमें सोवै?
क्यों अघ-मूल भोग-सुख-कारण मानव-जन्म बिगोवै?
शब्द-रूप-रस-गन्ध-स्पर्श-हित क्यों अतृप्त हो रोवै?
श्रीहरिका अति सरस भजन कर क्यों न पाप-मल धोवे?
हरिपद-पंकजका मधुकर बन क्यों न धन्य तू होवै?