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अरे मन, कर प्रभु पर बिस्वास / हनुमानप्रसाद पोद्दार

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 (राग कलिंगड़ा-ताल तीन ताल)
 
 अरे मन, कर प्रभु पर बिस्वास।
 क्यों इत-‌उत तू भटक्यौ डोलै, झूठे सुख की आस॥
 सुन्दर देह, सुहावनि नारी, सब बिधि भोग-बिलास।
 कहा भयौ धन-पुत्र भये तें, मिटी न जम की त्रास॥
 नौकर-चाकर, बंधु घनेरे, ऊँचौ पदबी खास।
 डरत लोग देखत भौं टेढ़ी करत मृत्यु उपहास॥
 मिथ्या मद-‌उन्मा गँवाये व्यर्थ अमोलक स्वास।
 पछितायें पुनि कछु न बसाये, बनै काल को ग्रास॥