भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"अस्मिता / कुबेरनाथ राय" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=कुबेरनाथ राय |अनुवादक= |संग्रह=कं...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
 
(कोई अंतर नहीं)

11:10, 18 सितम्बर 2019 के समय का अवतरण

मेरे मन की गहन गुहा में एक असुर रहता है
निशिचारी परियों के शव को हृदय लगाये
मन को मारे शीश झुकाये दिन में बैठा रहता
प्रतिसंध्या को पा प्रदोष बल अट्टहास करता है।

मेरे मन के अतल नीड़ में नील बिहंग बसेरा
निशि की माया विहग-नीड़ को स्वर्णपुरी में बदले
जहाँ असुर के नजरबाग में झरे रात शेफाली
नभ में बिचरे पंख पसारे पाकर पुनः सबेरा।

मेरे मन के गुहागर्भ में एक पुरुष अविनाशी
गुडाकेश निष्कंप शिखा सा अहरह जलता
दिवस-रात की मेरी परिक्रमा का यह साक्षी है
मधुमाधव का रस आखेटक काष्ठ मौन सन्यासी।

असुर, विहग, सन्यासी तीनों सुहद-सखा विश्वासी,
मन की मर्मकथा के ये तीनों हैं परिभाषी।

[1962 ]