भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आंदोलन / मधुप मोहता

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 09:22, 14 मार्च 2020 का अवतरण

यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मेरी भूख उभर आई है
गड्ढे बन मेरे गालों पर।
मेरी प्यास सिमट आई है
पपड़ी बन सूखे अधरों पर।
मेरा दर्द ढलक आया है,
आंसू बन मेरी अलकों पर।

ओ समाज के ठेकेदारों,
ज्वालामुखी फूट जाएगा
और चलो मत अंगारों पर।
मेरा लहू बिखर जाएगा
नारे बनकर दिवारों पर।

(कनु सान्याल के लिए)