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"आगु गई हुति भोर ही हों रसखानि / रसखान" का अवतरण इतिहास

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  • (सद्य | पिछला) 21:33, 16 मई 2014Sharda suman (चर्चा | योगदान). . (689 बाइट) (+689). . ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=रसखान |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KKCatPad}} <poem> आ...' के साथ नया पन्ना बनाया)