भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आग्या वक्त तेरे जागण का / सतबीर पाई

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 21:05, 2 सितम्बर 2014 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=सतबीर पाई |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KKCatHaryan...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आग्या वक्त तेरे जागण का सुण्या नहीं के शोर तनैं
बी.एस.पी. के हाथी ऊपर लाणी होगी मोहर तनैं...टेक

कितना प्यारा अखबार हमारा चाहिए तनै लवाणा
तेरै सब कुछ आज्या समझ देखकै इतिहास पुराणा
पढ़णा करदे शुरू बोल कै बिल्कुल ना शरमाणा
जय भारत जय भीम बोल कै तनै चाहिए नारा लाणा
नीला झण्डा चाहिए ठाणा पकड़ मिशन की डोर तनैं...

हिन्दी साप्ताहिक ‘बहुजन संगठक’ अखबार का यही है नाम
5323 हरध्यान सिंह रोड़, एक रैगरपुरा लिखो सरेआम
करोलबाग नई दिल्ली-110005 ध्यान लगा सुण पता तमाम
राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.एस.पी. संपादक श्री कांशी राम
थोड़े लागैं दाम थाम दिल क्यूं कर्या बता कमजोर तनैं...

भारतीय जनता पार्टी तनै कदे कदे जनता दल चाहवै
सादा भोला समझ खामखां कदे कांग्रेस छल जावै
सजपा, माकपा, निर्दलीय तेरै आज नहीं तै कल आवै
तू जिसका दे दे साथ सही सरकार उसी की चल पावै
सही नुमाइंदा ना थ्यावै सब मिलते डाकू चोर तनैं...

मान्यवर कांशी राम किसे इस भारत के पी.एम. हो
प्रकाश भारजी जी कैसे इस हरियाणा के सी.एम. हो
आई ए एस अफसर लागैं तेरे सब डी.सी. और एस.डी.एम. हो
बेरोजगारी तेरी दूर भागज्या तेरे जी.एम. और टी.एम. हो
चलणा चाहिए पाई वाले सतबीर सत्ता की ओर तनैं...