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आर्यों का प्रण (हँसी गीत) / खड़ी बोली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बन्नी –गीत( माँ की सीख -हास –परिहस)

आर्यों का प्रण निभाइयो मेरी लाड्डो

जै तेरा ससुरा मन्दी ऐ बोल्लै

पत्थर की बण जाइयो मेरी लाड्डो

आर्यों का प्रण निभाइयो मेरी लाड्डो


जो तेरी सासु गाळी ऐ देगी

ले मूसळ गदकाइयो मेरी लाड्डो

आर्यों का प्रण निभाइयो मेरी लाड्डो

जो तेरा जेठा मन्दी ऐ बोल्लै

घूँघट मैं छिप जाइयो मेरी लाड्डो

आर्यों का प्रण निभाइयो मेरी लाड्डो

जो तेरी जिठाणी गाळी देगी

ले सोट्टा गदकाइयो मेरी लाड्डो ।

आर्यों का प्रण निभाइयो मेरी लाड्डो


जो तेरा देवरा मन्दी ऐ बोल्लै

हाँसी मैं टळ जाइयो मेरी लाड्डो

आर्यों का प्रण निभाइयो मेरी लाड्डो


जो तेरी नणदा गाळी ऐ देगी

चुटिया पकड़ घुमाइयो मेरी लाड्डो

आर्यों का प्रण निभाइयो मेरी लाड्डो


जो तेरा राजा मन्दी ऐ बोल्लै

कुछ न पलट कै कहियो मेरी लाड्डो ।

आर्यों का प्रण निभाइयो मेरी लाड्डो