भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आवारा अश्आर / तुम्हारे लिए, बस / मधुप मोहता

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 08:39, 17 मार्च 2020 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आपकी हस्ती से, नामो-निशाँ से दूर,
आपके जलवों से अपने बयाँ से दूर,
आपकी धरती से और आसमाँ से दूर,
ढूँढ़ता हूँ मैं घर दोनों जहाँ से दूर।

प्यार है तो प्यार को ख़ामोश रहना चाहिए,
इश्क़ के इज़हार को ख़ामोश रहना चाहिए,
एक आँसू ही बहुत, हर सच बयाँ हो जाएगा,
टूटती पतवार को ख़ामोश रहना चाहिए।

साँस आने को है बीमार को, मर जाने दे,
रेशमी जु़ल्फों के मौसम को बिखर जाने दे,
जो तेरी आँखों का दीवाना है वो जाँ से गया,
चाँद का क्या है सुनो चाँद को घर जाने दे।

दिल में बस याद इक तुम्हारी है,
यूँ तो साँसों का सफ़र जारी है,
जो गुज़ारी न जा सकी हमसे,
हमने वो ज़िंदगी गुज़ारी है।

दिल का हर ज़ख़्म हरा है अब तक,
प्यार जिंदा है, खरा है अब तक,
टुकड़ा टुकड़ा सहेजा है जिसे बरसों,
ख्वाब आँखों में भरा है अब तक।

आपको और आज़माना क्या,
आप ही आप हैं ज़माना क्या,
आपको जाना जबसे जानेजाँ,
जीना क्या जान से जाना क्या।

आसमाँ भी बदल के देख लिया,
और ख़ुदा भी बदल के देख लिया,
होश में आके, दिल लगा ही नहीं,
गिर के उठकर सँभल के देख लिया।

फिर सुनहरा चाँद नीली चाँदनी सी रात,
फिर गुलाबी जाम से बहके हुए जज़्बात,
सुर्ख़ आँखों के इशारे जु़ल्फ़ की बरसात,
फिर तुम्हारा ज़िक्र, यादें, फिर तुम्हारी बात।

जब से तुमने भुला दिया है,
मुझको जड़ से हिला दिया है,
ये क्या जादू चला दिया है,
मुझको मुझसे मिला दिया है।

दिलों को ज़ार ही किया जाए,
आइए प्यार ही किया जाए,
बेरुख़ी उनकी और बेबसी मेरी,
चलिए, इज़हार ही किया जाए।

मेरे दिल की धड़कनों में तूफ़ाँ सा चल रहा है,
सोया हुआ था अजगर अब आँख मल रहा है,
अंधे सफ़र के जैसा, तुमसे है मेरा मरासिम,
रिश्तों का ये मुसाफ़िर, गिर-गिर के चल रहा है।

ग़ज़ब उसकी आँखों का काजल,
ग़ज़ब उसके ओठों की लाली,
ग़ज़ब मेरे क़ातिल की जुल्फें़,
ग़ज़ब उसके कानों की बाली।

सुलगते बेरंग, ख़्वाबों का शज़र,
रौशनी में डूबकर बुझता शहर,
बिना तेरे रात का, पिछला पहर,
बन गया है एक, जलती दोपहर।

चलो दीवारों से, देहरी से, और दर से कहें,
चलो रास्तों से, रहज़नों से, रहबर से कहें,
हम उनकी राह में, आँखें बिछाए गुमसुम हैं,
उन्हें ले आओ अब, दिल की बात उनसे कहें।

चलो दिलांे को पढ़ें आज फिर दिलांे को लिखें,
आँसुओं से, सियाही से और लहू से लिखें,
प्यार की वही इबारत, जो तू जानती है,
तेरी तसवीर के पहलू में, हाशियों पे लिखें।

महज़ पैबंद हैं, ये बादल बस,
टूट गया है, सितारों का तिलिस्म,
आसमान एक फटी हुई चादर है,
हर सितारे से झाँकता है, रौशनी का जिस्म।

कैसे न हो मुझे ग़म उम्र गँवाने का,
जिसकी तलाश थी, वो लम्हा नहीं मिला,
फ़ुरसत मिली कभी, जो ग़मे-रोज़गार से,
तन्हाई मिली तो वो तन्हा नहीं मिला।

तू रौशनी का शजर सही,
ज़रा सोच ले अगर कहीं,
तेरे अक़्स में निहाँ हूँ मैं,
नहीं हूँ पर हूँ मगर वहीं।

तेरी उदास निगाहें, तेरी खुली बाँहें,
ढले गेसू, बुझी साँसें और दबी आहें,
तू है मंज़िल कई बेताब राहगीरों की,
और हम थामे हुए दिल बस तुझे चाहें।

जख़्म इस दिल का सिल जाता,
आपको वक़्त अगर मिल जाता,
जान फिर जाते-जाते रह जाती,
और जाना था तो फिर दिल जाता।

आईना देख के क्यों शर्माते हैं वो,
दिलजलों को यूँ और जलाते हैं वो,
यूँही हैरान-परेशान थे हम पहले से,
और सितम ये कि इतराते हैं वो।

इश्क़ होना है इश्क़ में कुछ ना होना,
होते-होते ही तो इश्क़ ख़ुदा होता है,
इश्क़ का रंग गहरा है तभी चढ़ता है,
कोई बेख़ुद जब ख़ुद से जुदा होता है।

आपने प्यार तो किया होगा,
दिल ने इज़हार तो किया होगा,
जिसकी यादांे में खोए रहते हैं,
उससे इनकार तो किया होगा।

जब इशारों में बात होती है,
आबशारों की बात होती है,
जहाँ दो-चार हसीं मिल बैठंे,
जाँनिसारों की बात होती है।

दिल में थोड़ा सा प्यार रखते हैं,
ज़रा जुनूँ कुछ ऐतबार रखते हैं,
तो आइए हाज़िर हैं हम भी हुज़ूर,
हुनर हम भी हज़ार रखते हैं।

जा रहे हैं जहाँ से तो फ़िक्र क्या करना,
जिएँ या मरें तुम्हें इससे क्या करना,
जीना-मरना तो दोस्त लगा रहता है,
उनको जाने की ख़बर क्या करना।

चलो अब आसमाँ पे जाएँगे,
हँसते-हँसते जहाँ से जाएँगे,
जान भी जाते-जाते जाएगी,
आपको आज़मा के जाएँगे।

कुछ सुना जाएगा कुछ उनको सुनाया जाएगा,
उम्र भर का तजुर्बा यूँ आज़माया जाएगा,
इश्क़ क्या है जुनूँ क्या है यक़ीं क्या है क्या फ़रेब,
क़त्ल का नुस्ख़ा समझकर फिर सिखाया जाएगा।

किसी काफ़िर की इबादत की तरह,
दिल है इक तन्हा इमारत की तरह,
और तू है ख़ामोश बग़ावत की तरह,
बिसरे बचपन की शरारत की तरह।

न तितलियों की उड़ान में, न खुशबुओं के मकान में,
मेरे लफ़्ज खोए हैं आज फिर, तेरी याद के बियाबान में,
कभी हिज्र की रात का चाँद बन, कभी बेसबब सा ख्वाब बन,
तू रवाँ है हरसूँ ख़याल में मेरी नज़्म के उनवान में।

छलके आँसू, उखड़ी साँसें, बहकी बातें,
थोड़ी सी तुम, थोड़ा सा मैं, महकी रातें।

इस जनम में भागा किए दीदार के लिए,
एक उम्र है कम इश्क़ के इज़हार के लिए।

आपकी याद ही काफ़ी है ज़िंदगी के लिए,
यूँ ही हर रात गुज़ारी है बंदगी के लिए।

ये, जो पत्थर सा रखा है दिल पर मेरे,
ये तेरा हाथ है या मेरी तन्हाई है।

तुम जो ठहरो तो ज़रा वक़्त गुज़र जाएगा,
तुम जो गुज़रीं तो कहीं वक़्त ठहर जाएगा।

कहीं घुटन, कहीं आँसू, कहीं अँधेरा है,
सुना है हिंद में फिर से नया सवेरा है।

और क्या उम्मीद रखते आपसे,
आप पर आया, तो दिल जाता रहा।

ये रोज़-रोज़ के किस्से, कहानियाँ और तुम,
तुम्हें लिखें कि पढ़े, या तुमसे कोई बात करें।

बेखुदी में खुदा नहीं होता,
इश्क़ होता है या नहीं होता।