भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
© कॉपीराइट     योगदानकर्ता     कविता कोश टीम

आह!! / राजीव रंजन प्रसाद

Kavita Kosh से
Rajeevnhpc102 (वार्ता | योगदान)ने किया हुवा 17:38, 9 नवम्बर 2009का अवतरण

(अंतर) ← पुराना संस्करण | वर्तमान संशोधन (अंतर) | नया संशोधन → (अंतर)
यहां जाएं: भ्रमण, खोज

भुच्च काला
पसलियों सना सीना
और बेहद फूला पेट
बिलकुल नंगा
वह, उस अखबार पर की जूठन
चाट रहा है
जिसपर अमेरिका के झंडे की फोटो
लहराती हुई छपी है
कसरती बदन वाले बुश साहब
मुस्कुराते दिखते हैं।
रेडियो में दूर कहीं बज रहा है
सारी दुनियाँ का बोझ हम उठाते हैं
अखबार में छपा है
हिन्दुस्तानी ज्यादा खाते हैं
और सारी दुनियाँ
इसी से भूखों मर रही है..

उसका फूला हुआ पेट
बिलकुल ग्लोब की तरह दिखता है
और नाक भौं सिकोडते
उस विदेशी सैलानी के आगे
हाँथ फैलाये खडा अब
भूखे होने का इशारा करता
नादान!! नहीं जानता
कि कोई कोंडलिसा ‘राईस’ नहीं देती..

बाजार मे भीड है
वह मूढ नावाकिफ है
कि भारत एक बडा बाजार है
उसे चिंता भी नहीं
तन पर एसा कोई चीथडा नहीं
जिसमें जेब हो
उसका फैला हुआ हाँथ
अब तक खाली है..

द्रौपदी का पात्र
एक दाने से जगत को तृप्त करता था
नादान ने वह कीमती दाना निगल लिया है
उसे भी पचता नहीं है
बुश को भी नहीं
और दुनिया भूखी मर रही है
आह...

19.05.2008



अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश की इस टिप्पणी के बाद कि "दुनियाँ में भुखमरी इस लिये है कि हिन्दुस्तानी ज्यादा खाते हैं"।

वैयक्तिक औज़ार
» रचनाकारों की सूची

गद्य कोश

» विभाग

» अन्य भाषाओं से

» महत्त्वपूर्ण संदेश
  • फ़िलहाल नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। कृपया अपनी रचनाएँ कोश में जोड़ने के लिए अभी आवेदन न करें। आगे की सूचना इसी जगह प्रकाशित की जाएगी।
  • कविता कोश से संबंधित हर जानकारी पाने के लिए पढ़ें: कविता कोश: हिन्दी काव्य में जुड़ता एक नया आयाम

» प्रादेशिक कविता कोश

» अन्य महत्त्वपूर्ण पन्नें

» अन्य पन्नें