भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आ गया सूरज / कृष्ण कल्पित

Kavita Kosh से
Anupama Pathak (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 05:06, 7 अक्टूबर 2015 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=कृष्ण कल्पित |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KK...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

धूप का बस्ता उठाए आ गया सूरज,
बैल्ट किरणों की लगाए, आ गया सूरज!
भोर की बुश्शर्ट पहने
साँझ का निक्कर,
दोपहर में सो गया था
लॉन में थककर।
सर्दियों में हर किसी को भा गया सूरज!
हर सुबह रथ रोशनी का
साथ लाता है,
साँझ की बस में हमेशा
लौट जाता है।
दोस्तों को दोस्ती सिखला गया सूरज!