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पहचान सके कि मेरे दिल में
 
पहचान सके कि मेरे दिल में

11:49, 22 नवम्बर 2009 के समय का अवतरण

   इज़्हार[1]

पत्थर की तरह अगर मैं चुप रहूँ
तो ये न समझ कि मेरी हस्ती[2]
बेग़ान-ए-शोल-ए-वफ़ा[3] है
तहक़ीर[4] से यूँ न देख मुझको
ऐ संगतराश[5]!
 तेरा तेशा[6]
मुम्किन[7] है कि ज़र्बे-अव्वली[8] से
पहचान सके कि मेरे दिल में
जो आग तेरे लिए दबी है
वो आग ही मेरी ज़िंदगी है

शब्दार्थ
  1. अभिव्यक्ति
  2. अस्तित्व
  3. प्रेम-प्रतिज्ञा से अनभिज्ञ
  4. उपेक्षा
  5. मूर्तिकार
  6. छैनी
  7. संभव
  8. पहली चोट