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इज़्हार / फ़राज़

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   इज़्हार[1]

पत्थर की तरह अगर मैं चुप रहूँ
तो ये न समझ कि मेरी हस्ती[2]
बेग़ान-ए-शोल-ए-वफ़ा[3] है
तहक़ीरसन्दर्भ त्रुटि: अमान्य <ref> टैग; नाम रहित संदर्भों में जानकारी देना आवश्यक है से यूँ न देख मुझको
ऐ संगतराश[4] तेरा तेशा[5]
मुम्किन[6] है कि ज़र्बे-अव्वली[7] से
पहचान सके कि मेरे दिल में
जो आग तेरे लिए दबी है
वो आग ही मेरी ज़िंदगी है

शब्दार्थ
  1. अभिव्यक्ति
  2. अस्तित्व
  3. प्रेम-प्रतिज्ञा से अनभिज्ञ
  4. मूर्तिकार
  5. छैनी
  6. संभव
  7. पहली चोट