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"इस्लामाबाद / असद ज़ैदी" के अवतरणों में अंतर

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मौसम ख़ुशनुमा था धूप में
 
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तेज़ी न थी हवा धीरे धीरे
 
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चलती थी, पैदल चलता आदमी
 
चलती थी, पैदल चलता आदमी
 
 
चलता चला जा सकता था कई मील
 
चलता चला जा सकता था कई मील
 
 
बड़े मज़े से
 
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यह भी एक ख़ुशफ़हमी थी हालाँकि
 
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मेरे साथ चलते शुक्ल जी से जब रहा न गया
 
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तो बोले :  
 
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मेरे विचार से तो अब हमें इस्लामाबाद पर
 
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परमाणु बम गिरा ही देना चाहिए।
 
परमाणु बम गिरा ही देना चाहिए।
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19:21, 8 नवम्बर 2009 के समय का अवतरण

मौसम ख़ुशनुमा था धूप में
तेज़ी न थी हवा धीरे धीरे
चलती थी, पैदल चलता आदमी
चलता चला जा सकता था कई मील
बड़े मज़े से

यह भी एक ख़ुशफ़हमी थी हालाँकि

मेरे साथ चलते शुक्ल जी से जब रहा न गया
तो बोले :

मेरे विचार से तो अब हमें इस्लामाबाद पर
परमाणु बम गिरा ही देना चाहिए।