भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"ईसुरी की फाग-11 / बुन्देली" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(New page: {{KKGlobal}} {{ KKLokRachna |रचनाकार=ईसुरी }} जो तुम छैल, छला हो जाते, परे उंगरियन राते भौं ...)
 
 
(एक अन्य सदस्य द्वारा किया गया बीच का एक अवतरण नहीं दर्शाया गया)
पंक्ति 1: पंक्ति 1:
 
{{KKGlobal}}
 
{{KKGlobal}}
{{
+
{{KKLokRachna
KKLokRachna
+
|रचनाकार=अज्ञात
|रचनाकार=ईसुरी
+
}}
 +
{{KKLokGeetBhaashaSoochi
 +
|भाषा=बुन्देली
 
}}
 
}}
  
 
जो तुम छैल, छला हो जाते, परे उंगरियन राते
 
जो तुम छैल, छला हो जाते, परे उंगरियन राते
  
भौं पौंछत गालन के ऊपर, कजरा देत दिखाते
+
मौं (मुँह) पौंछत गालन के ऊपर, कजरा देत दिखाते
  
 
घरी-घरी घूंघट खोलत में, नज़र सामने आते
 
घरी-घरी घूंघट खोलत में, नज़र सामने आते
  
 
'ईसुर' दूर दरस के लानें, ऎसे काए ललाते ?
 
'ईसुर' दूर दरस के लानें, ऎसे काए ललाते ?

18:26, 13 जुलाई 2008 के समय का अवतरण

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

जो तुम छैल, छला हो जाते, परे उंगरियन राते

मौं (मुँह) पौंछत गालन के ऊपर, कजरा देत दिखाते

घरी-घरी घूंघट खोलत में, नज़र सामने आते

'ईसुर' दूर दरस के लानें, ऎसे काए ललाते ?