भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"उपलब्धि और निवृत्ति/ घनश्याम चन्द्र गुप्त" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=घनश्याम चन्द्र गुप्त |अनुवादक= |स...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
(कोई अंतर नहीं)

03:34, 2 जनवरी 2019 का अवतरण

उपलब्धि और निवृत्ति

जो भी, जैसा भी, जितना भी दोनों बांहों के घेरे में आ समाया उसी से सम्पन्न, वैसे से ही संतुष्ट उतने से ही परिपूर्ण मैंने उसे यथाशक्ति जकड़ लिया अपनी बाहों के शिथिल बंधन में छूटना चाहे तो छुट जाय उसकी मुक्ति, मेरी मुक्ति

और जो रह गया परिधि के बाहर सीमा से परे क्षितिज के उस पार अलभ्य, अग्राह्य, अप्राप्य उसके लिये स्वीकार है अन्ततोगत्वा मरण उपलब्धि के लिये नहीं निवृत्ति के लिये


- घनश्याम, १४ फरवरी, २००९ </poem>