भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

उल्फ़त नशे का ज़िद सभी सच्चा गुरूर होगा / बिन्दु जी

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 02:02, 18 अक्टूबर 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=बिन्दु जी |अनुवादक= |संग्रह=मोहन म...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

उल्फ़त नशे का ज़िद सभी सच्चा गुरूर होगा।
परमात्मा उसी दम जाहिर जरूर होगा॥
अधमों की अधमता पर खुश हो अधम उधारण।
फिर क्यों न अधमता पर हमको गुरूर होगा॥
हर शै में उसकी सूरत उस दिन झक पड़ेगी।
जिस दिन दुई का पर्दा इस दिल से दूर होगा॥
लग जाएगी जो उसके कदमों की एक ठोकर।
पापों का सख्त पुतला पल भर में चूर होगा॥
गर अश्रु ‘बिन्दु’ यूं ही बरसेंगे तो बिला शक।
बंदे के सामने ख़ुद हाजिर हुजूर होगा॥