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एक कर में वीणा लिये, एक कर में करताल / नाथ कवि

शारदा स्तुति

एक कर में वीणा लिये, एक कर में करताल।
एक कर में पुस्तक लसै, एक कर मुक्ता माल॥
एक कर मुक्ता माल, मकुट की शोभा न्यारी।
गल मणियन के हार, हंस वाहन शुभ कारी॥
कविता में हो सूर सरस, तुलसी सी गाथा।
यह माँगत बरदान, मातु शारद कवि ‘नाथा’॥