भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

"एक तो चेहरा ऐसा हो / फ़रहत शहज़ाद" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=फ़रहत शहज़ाद |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KK...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
 
 
पंक्ति 7: पंक्ति 7:
 
{{KKCatGhazal}}
 
{{KKCatGhazal}}
 
<poem>
 
<poem>
तो चेहरा ऐसा हो  
+
एक तो चेहरा ऐसा हो  
 
मेरे लिए जो सजता हो  
 
मेरे लिए जो सजता हो  
  

04:56, 10 अगस्त 2017 के समय का अवतरण

एक तो चेहरा ऐसा हो
मेरे लिए जो सजता हो

शाम ढले एक दरवाज़ा
राह मेरी भी तकता हो

मेरा दुःख वो समजेगा
मेरी तरह जो तनहा हो

एक सुहाना मुस्तकबिल
ख़ाब सा जैसे देखा हो

अब 'शहज़ाद' वो दीपक है
जो तूफ़ान में जलता हो