भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ए मेरी पतरी कमर नारो झुब्बादार लाइयो / हरियाणवी

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 18:20, 9 जुलाई 2014 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |भाषा=हरियाणवी |रचनाकार=अज्ञात |संग्रह=फा...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ए मेरी पतरी कमर नारो झुब्बादार लाइयो
झुब्बादार लाइयो करेलीदार लाइयो
ऐ मेरी पतरी कमर.....
तुम सहर बरेली जाइयो, आच्छा सा सुरमा लाइयो
लगाइयो अपने हाथ, नारी झुब्बादार लाइयो
ऐ मेरी पतरी कमर....
तुम सहर बनारस जाइयो, बढ़िया सी साड़ी लाइयो
बन्धाइयो अपने हाथ, नारो झुब्बादार लाइयो
ऐ मेरी पतरी कमर...
तुम मथुरा जी को जाइयो, अच्छे पेरा लाइयो
खवाइयो अपने हाथ, नारो झुब्बादार लाइयो
ऐ मेरी पतली कमर...
तुम बिन्दराबन को जाइयो, आच्छौ सो लहंगो लाइयो
पहनाइयो अपने हाथ, नारो झुब्बादार लाइयो
ऐ मेरी पतली कमर...