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ओर न छोर / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

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1
ओर न छोर
सिर्फ तुम प्राणों में
समाते गए
ऋचा बने हो तुम
हम तो गाते गए।
2
तोड़ी है रीत
जोड़ी केवल प्रीत
जिंदा रखना
रोज -रोज क्यों डरें
बिना मौत क्यों मरें।
3
देना भरोसा-
मिलेंगे एक दिन
प्राण व्याकुल
होगी विलीन प्यास
बची मिलन आस।
4
जन्मों से साथ
गहा है तेरा हाथ
छूटेगा नहीं
तुम प्रण -प्राण हो
रूठना नहीं कभी।
5
होती ही गई
तार-तार ज़िंदगी
इतना छला
प्राण हिम से गले
मिल न सके गले।
-०-