भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

और जाल सब भिणभिणी तूं क्यों हे हरियाली / हरियाणवी

Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 16:21, 17 जुलाई 2014 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKLokRachna |भाषा=हरियाणवी |रचनाकार=अज्ञात |संग्रह= }} {{...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

और जाल सब भिणभिणी तूं क्यों हे हरियाली
के तूं माली सींचिया के तेरी जड़ पैंताल
न मैं माली सींचिया न मेरी जड़ पैंताल
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
मेरे तले जाहर सो रहा सूत्या है वो चादर ताण
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
मूंधे हुए बिलौवणे रीती है ये जा चकिहार
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
ठाणां रांभै बाछडू डहरां री वे लागड़ गाय
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
के सोवै मेरे लाड़ले? डहरां रे वे तेरी लागड़ गाय
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
जाहर उठा भड़क कै टूटे री पिलंगा के साल
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
पांचों ल्यावो कापड़े तीनों ल्यावो हथियार
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
सीम सिमे पर नावड़या ल्याया री वो गऊ छुटाय
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
अर्जुन मार्या बड़तले सर्जुन री वो सरवल पाल
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
खाई के ओल्हे मौसी खड़ी कहदे रे बीरा मन की बात
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
उठ उठ री मां हाथ धुवा मारे री मौसी के लाल
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
बुरी करी रे मेरे लाडले मारे रे मौसी के लाल
वारी मेरा जाहर मिल गइयां
मौसी करदी ऊतणी भावज रे तनें करदी रांड
वारी मेरा जाहर मिल गइयां