भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
कबीर
Kavita Kosh से
|
कबीर www.kavitakosh.org/kabir | |||
|
जन्म: 1398
निधन: 1518
| |||
| उपनाम | कबीरा | ||
| जन्म स्थान | भारत | ||
| कुछ प्रमुख कृतियाँ | बीजक, कबीर ग्रंथावली और कबीर रचनावली | ||
| विविध | कबीर की रचनाओं में अनेक भाषाओँ के शब्द मिलते हैं यथा - अरबी, फारसी, भोजपुरी, पंजाबी, बुन्देलखंडी, ब्रज, खड़ीबोली आदि के शब्द मिलते हैं इसलिए इनकी भाषा को 'पंचमेल खिचड़ी' या 'सधुक्कड़ी' भाषा कहा जाता है | ||
| जीवनी | कबीर / परिचय | ||
| |||
- दोहावली / कबीर (दोहों का संकलन)
- कबीर ग्रंथावली / कबीर (कविता संकलन)
<sort order="asc" class="ul">
- काहे री नलिनी तू कुमिलानी / कबीर
- मन मस्त हुआ तब क्यों बोलै / कबीर
- रहना नहिं देस बिराना है / कबीर
- कबीर की साखियाँ / कबीर
- हमन है इश्क मस्ताना / कबीर
- कबीर के पद / कबीर
- नीति के दोहे / कबीर
- मोको कहां / कबीर
- तेरा मेरा मनुवां / कबीर
- बहुरि नहिं आवना या देस / कबीर
- बीत गये दिन भजन बिना रे / कबीर
- नैया पड़ी मंझधार गुरु बिन कैसे लागे पार / कबीर
- राम बिनु तन को ताप न जाई / कबीर
- करम गति टारै नाहिं टरी / कबीर
- भजो रे भैया राम गोविंद हरी / कबीर
- दिवाने मन, भजन बिना दुख पैहौ / कबीर
- झीनी झीनी बीनी चदरिया / कबीर
- केहि समुझावौ सब जग अन्धा / कबीर
- तूने रात गँवायी सोय के दिवस गँवाया खाय के / कबीर
- मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में / कबीर
- रे दिल गाफिल गफलत मत कर / कबीर
- घूँघट के पट / कबीर
- गुरुदेव का अंग / कबीर
- सुमिरण का अंग / कबीर
- विरह का अंग / कबीर
- जर्णा का अंग / कबीर
- पतिव्रता का अंग / कबीर
- कामी का अंग / कबीर
- चांणक का अंग / कबीर
- रस का अंग / कबीर
- माया का अंग / कबीर
- कथनी-करणी का अंग / कबीर
- सांच का अंग / कबीर
- भ्रम-बिधोंसवा का अंग / कबीर
- साध-असाध का अंग / कबीर
- संगति का अंग / कबीर
- मन का अंग / कबीर
- चितावणी का अंग / कबीर
- भेष का अंग / कबीर
- साध का अंग / कबीर
- मधि का अंग / कबीर
- बेसास का अंग / कबीर
- सूरातन का अंग / कबीर
- जीवन-मृतक का अंग / कबीर
- सम्रथाई का अंग / कबीर
- उपदेश का अंग / कबीर
- कौन ठगवा नगरिया लूटल हो / कबीर
- मेरी चुनरी में परिगयो दाग पिया / कबीर
- अंखियां तो छाई परी / कबीर
- माया महा ठगनी हम जानी / कबीर
- सुपने में सांइ मिले / कबीर
- मोको कहां ढूँढे रे बन्दे / कबीर
- अवधूता युगन युगन हम योगी / कबीर
- कौन ठगवा नगरिया लूटल हो / कबीर
- साधो ये मुरदों का गांव / कबीर
- मन ना रँगाए, रँगाए जोगी कपड़ा / कबीर
- निरंजन धन तुम्हरा दरबार/ कबीर
</sort>
| भक्तिकालीन रचनाकार | भक्तिकाल क्या है | ||
| ज्ञानाश्रयी शाखा | कबीर । रैदास । मलूकदास | ![]() |
| प्रेमाश्रयी शाखा | मलिक मोहम्मद जायसी | |
| कृष्णाश्रयी शाखा | सूरदास । नंददास । कृष्णदास । परमानंददास । कुम्भनदास । चतुर्भुजदास । छीतस्वामी । गोविन्दस्वामी । मीराबाई । नरोत्तमदास । रहीम । रसखान । विद्यापति | |
| रामाश्रयी शाखा | तुलसीदास | |
|
|
||
