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करबला / अली सरदार जाफ़री

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करबला
[एक रजज़][1]

फिर अलअतश की है सदा
जैसे रजज़ का ज़मज़मा
फिर रेगे-सहरा पर रवाँ
है अहले-दिल का कारवाँ
नहरे-फ़ुरात आतश-ब-ज़ाँ
रावि-ओ-गंगा ख़ूँचिकाँ
कोई यज़ीद[2]-ए-वक़्त हो
या शिम्र हो या हुरमुला
उसको ख़बर हो या न हो
रोज़े-हिसाब आने को है
नज़्दीक है रोज़े-जज़ा
ऐ करबला ऐ करबला

२.

गूँगी नहीं है ये ज़मीं
गूँगा नहीं ये आसमाँ
गूँगे नहीं हर्फ़ो-बयाँ
गूँगी अगर है मस्लिहत
ज़क़्मों को मिलती है ज़बाँ
वो खूँ जो रिज़्क़-ख़ाक़ था
ताबिन्दा है पाइन्दा है
सदियों की सफ़्फ़ाकी सही
इन्सान अब भी ज़िन्दा है
हर ज़र्रा-ए-पामाल[3] में
दिल के धड़कने की सदा
ऐ करबला ऐ करबला




अर्शे-रुऊनत के ख़ुदा
अर्ज़े-सितम के देवता
ये टीन और लोहे के बुत
ये सीमो-ज़र के किब्रिया[4]
बारूद है जिन की कबा[5]
रॉकेट की लय जिन की सदा
तूफ़ाने-ग़म से बेख़बर
ये क़समवादो-कमहुनर[6]
निकले हैं ले के अस्लिहा
लेकिन जल उट्ठी ज़ेरे-पा
रेगे-नवाहे-नैनवा
आँधी है मश्रिक़ की हवा
शो’ला फ़लसतीं की फ़ज़ा
ऐ करबला ऐ कराबला


ये मदरसे दानीशकदे[7]
इल्मो-हुनर के मयकदे
इनमें कहाँ से आ गये
ये कर्गसों के घोंसले
ये जह्‌ल की परछाइयाँ
लेती हुई अंगडाइयाँ
दानिशवराने-बेयक़ीं
ग़ैरों के दफ़्तर के अमीं
अल्फ़ाज़ के ख़्वाजासरा[8]
इनके तसर्रुफ़ में नहीं
ख़ूने-बहारे-ज़िंदगी
इनके तसर्रुफ़ में नहीं
ख़ूने-हयाते-ज़ाविदाँ[9]
बर्हम है इनसे रंगे-गुल
आज़ुर्दा है बादे-सबा
ऐ करबला ऐ करबला



लेकिन यही दानिश क़दे
हैं इश्क़ के आतशक़दे[10]
हैं हुस्न के ताबिशक़दे[11]
पलते हैं जिनकी गोद में
लेकर अनोखा बाँकपन
अस्रे-रवाँ के कोहकन
मेरे ज़वानाने-चमन
बुलबुल-नवा, शाहीं अदा
ऐ करबला ऐ करबला



ऐ ग़म के फ़र्ज़न्दो उठो
ऐ आरज़ूमन्दो उठो
ज़ुल्फ़ों की गलियों में रवाँ
दिल की नसीमे-ज़ाँफ़िज़ा
होटों की कलियों में ज़वाँ
बूए-गुल-ओ-बूए-वफ़ा
आँखों में तारों की चमक
माथों पे सूरज की दमक
दिल में जमाले-शामे-गम
रुख़ पर जलाले-बेनवा
गूँजी हुई ज़ेरे-क़दम
तारीक़ की आवाज़े-पा
शमशीर हैं दस्ते-दुआ
ऐ करबला ऐ करबला



प्यासों के आगे आएँगे
आएँगे लाये जाएँगे
आसूदगाने-जामे-ज़म
सब साहिबाने-बेकरम
खुल जाएगा सारा भरम
झुक जाएँगे तेग़ो-अलम[12]
पेशे-सफ़ीराने-क़लम[13]
रख़शन्दा[14] है रूहे-हरम
ताबिन्दा है रूए-सनम
सरदार के शि’रों में है
ख़ूने-शहीदाँ की ज़िया[15]
ऐ करबला ऐ करबला


शब्दार्थ
  1. युद्धक्षेत्र में कुल की विरता और श्रेष्ठता का वर्णन
  2. एक पतित और अयाचारी शासक, जिसने हज़रत इमाम हुसैन को शहीद कराया था
  3. पैरों के नीचे कुचले हुए कण
  4. ईश्वर
  5. चोगा, गाइन
  6. प्रतिभाहीन और निर्गुण
  7. विद्यालय
  8. सेवक
  9. शाश्वत जीवन
  10. आग के घर
  11. ज्योतिगृह
  12. तलवार और पताकाएँ
  13. लेखनी के दूत
  14. हर्षित
  15. आलोक