भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

कर अनरीति तज दीनी राजनीति जिन्ना / नाथ कवि

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 17:33, 18 जनवरी 2017 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=नाथ कवि |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KKCatBrajBhashaRa...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कर अनरीति तज दीनी राजनीति जिन्ना।
सूझे नीति पंथ नाहिं दिन का जु फेरा है॥
मान सान गारत भई है सब भारत में।
जेबरी गई है जर ऐंठ का बखेरा है॥
झूठे वायदों से ये न मानें अल्प संख्यक ‘नाथ’।
पाकिस्तान हिन्द का तो ये ही निखेरा है॥
होय जो बसेरा सब भाई बन लागै हिये।
तब ही स्वतंत्रता का जानिये सबेरा है॥