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कविता कोश सर्वभाषा काव्य गोष्ठी, बेगूसराय, बिहार

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दिनांक 30 जुलाई 2017 को विश्व अंगिका महासभा के छः वर्ष पूरे होने के अवसर पर कविता कोश सूत्र के अंतर्गत सर्वभाषा काव्य गोष्ठी का आयोजन विश्व अंगिका महासभा के मुख्य कार्यालय, सरस्वती निवास, बेगूसराय में किया गया। कार्यक्रम का उदघाटन श्री श्याम नंदन झा ने किया।

इस कार्यक्रम में अध्यक्ष के रूप में जनकवि दीनानाथ सुमित्र, मुख्य अथिति के रूप में भागलपुर से आये उमाकांत झा 'अंशुमाली', बांका से आये महादेव ठाकुर, सिमरिया के निशाकर जी, बेगूसराय के श्री मनोज, रंजन कुमार झा, [रूपम झा], शगुफ़्ता ताजवर और राहुल शिवाय उपस्थित थे।

प्रारम्भ में रूपम झा और शगुफ़्ता ताजवर ने गोष्ठी के महत्व और महिला सशक्तिकरण पर अपना वक्तव्य दिया। इसके बाद निशाकर जी ने लोकभाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। राहुल शिवाय और अंशुमाली जी ने अंगिका साहित्य से जुड़ी जानकारियाँ साझा की।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया जिसका संचालन राहुल शिवाय ने किया। अंशुमाली जी ने अंग गीत से काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया:

जहाँ जन-जन में सेवा, विनम्रता, मधुर बोली के ज्ञान
जें विश्वन्धुता, सहनशीलता, शांति के दे सन्देश...
पथिक! ई हमरोॅ अंग प्रदेश

निशाकर जी ने स्त्रियों के लिए मैथिली भाषा में अपनी कविता पढ़ते हुए कहा:

संसारक एकटा अजगुत जीव होइत अछि
स्त्री
धरती जकाँ
धारण कयने रहैत अछि धैर्य

रूपम झा ने हिंदी दोहे के माध्यम से स्त्री का चित्रण करते हुए कहा:

लोहे-सी मजबूत है, हर औरत की जात
घर से दफ्तर आज ये, बढ़ा रही है हाथ

Angika-kavita-kosh-30july-2017.jpg

महादेव ठाकुर जी ने अपने तीखे व्यंग से समाचार पत्रों और राजनीति पर प्रहार करते हुए कहा:

ह के हुए हलन्त यहाँ
जों खबरोॅ के बात सुनोॅ
आय विपक्षोॅ के तोहें
खाली सह आरो मात सुनोॅ

रंजन जी ने हिंदी में कविता अपनी कविता पढ़ते हुए कहा-

भटियारों का सत्ता पर अब पूरी तरह नियंत्रण है
हक़ की बातें. देशद्रोह की धारा का आमंत्रण है

शगुफ़्ता ताजवर जी ने हिंदी गजल पेश करते हुए कहा:

फिर से उजड़े हैं दीवाने
शहर नया बसाया जाए

जनकवि दीनानाथ सुमित्र जी ने हिंदी मुक्तक के माध्यम से कहा:

जिंदा मरना जिसे नही आता
आह भरना जिसे नही आता
आदमी हो नहीं कभी सकता
प्यार करना जिसे नहीं आता

राहुल शिवाय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व अंगिका महासभा के अध्यक्ष डॉ. अमरेंद्र ने कहा है अंगिका भाषा में राष्ट्रप्रेम की रचनाओं की जरुरत है और मैंने कल ही एक गीत देश के युवाओं के लिए लिखा है:

तोरा रहतें केना भारती के आँखों में पानी
जागो भारत वासी जागो, जागो हे बलिदानी

अंत में श्री मनोज जी ने दंगा कविता के माध्यम से देश में हो रही समस्या का वर्णन और धन्यवाद ज्ञापन किया।