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कहाँ के ऊजे लामू लहेरिया / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

कहाँ के ऊजे लामू[1] लहेरिया[2]
झुलनियाँ वाली तोर[3] चूड़ी कते में[4] बिकाऊ?॥1॥
हमरो जे चुड़िया साँवरो[5] लच्छ[6] रूपइया।
तोर बहियाँ घूमि घूमि जाय।
झुलनियाँ वाली तोर चूड़ी कते में बिकाऊ?॥2॥
हमरो जे पियवा साँवरो बड़ रँगरसिया।
बने बने[7] बँसिया बजावे।
झुलनियाँ वाली तोर चूड़ी कते में बिकाऊ?॥3॥

शब्दार्थ
  1. लम्बा
  2. चूड़ी बेचने वाला, लहेरी
  3. तुम्हारी
  4. कितने में
  5. साँवली, श्याम वर्ण की
  6. लाख
  7. वन-वन में